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            भारतकेसामनेआजअनेकसमस्याएँहै।लेकिनबेकारीकीसमस्यासबसेविकटएवंचिन्ताजनक
है।आजअशिक्षितहीनहींबल्किशिक्षितभीबेकारघूमतेनजरआतेहैंस्कूलोंएवंकालेजोंसेनिकलकरशिक्षितजननौकरीकेलिएदर-दरभटकरहैहैकिन्तुनौकरीमिलनाबहुतमुश्किलहै।बेकारीकेकारणलोगोंमेंएकप्रकारसेअसंतोषकीभावनाफैलगयीहै।विद्यार्थीसमूहके, हिंसात्मककार्योंमेंप्रवृतहोनेकाएककारणयहीबेरेज़गारीकीसमस्याहै।

           देशमेंव्याप्तइसबेकारीकेकईकारणमानेजातेहैबेकारीकामुख्यकारणजन-संख्याकीवृद्धिहै।जन-सख्याकीयहीवृद्धिहमारेदेशकेआर्थिकविकासकोअवरुद्धकररहीहै।बेरोज़गारीहटानेकेलिएबनीहमारीसभीयोजनाएँइसीकारणविफलहोरहीहै।बेकारीकीसमस्याकादूसराकारणहैहमारीदोषपूर्णशिक्षाप्रणाली।आजजोविद्यार्थीमहाविद्यालयोंएवविश्व - विद्यालयोंसेनिकलकरआतेहैं, वेदफ्तरमेंनौकरीकरनेकेअतिरिक्तकिसीऔरकामकेलिएअयोग्यरहतेहैं।सभीकेसिरपरदफ्तरीबाबूबननेकीधुनचढीरहतीहैकोईदुसरा
कामधन्धाकरनावेपसंदनहींकरनेहैं।झूठीशानकेकारणउन्हेंअपनेहाथसेकामकरनेमेंलज्जाहोतींहै।इससमस्याकातीसराकारणहैकुटीर- उद्योगोंकापतनजोकामहाथोंसेकियाजानाचाहिएवहभीहमअबमशीनोंसेकररहेहैंइसकारणसेलाखोंकृषकएवंशिल्पकारबेरोज़गारहोतेजारहेहैंअत: मशीनोंसेअधिककामलेनाभीबेकारीकीसमस्याकाएकमुख्यकारणहै।

वास्तवमेंजवतकबेकारीकीसमस्याहलनहींहोजाती, तबतकदेशकेविकासकीआशानहीं
करसकतेइससमस्याकेसमाधानकेलिएहमबढतीहुईआबादीकोरोकें, औद्योगिकप्रशिक्षणपरज़ोरदें, कुटीरउद्योगोंकाविकासकरेंऔरमशीनोंसेकामलेनेपररोक-थामलगाऐं
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